हम त्रिएकता पर क्यों विश्वास करते हैं?

त्रिएकता का सिद्धान्त मसीही विश्वास का मुख्य केन्द्र है, जिस पर कलीसिया आरम्भ से ही विश्वास करती आ रही है। कलीसिया त्रिएकता पर इसलिए विश्वास करती है, क्योंकि परमेश्वर ने स्वयं को त्रिएक परमेश्वर के रूप में प्रकट किया है। त्रिएकता एक ऐसा सत्य है जिसे हम अपनी सीमित बुद्धि से पूर्णतः नहीं समझ सकते हैं, फिर भी बाइबल के द्वारा हम इस शिक्षा को सच्चाई से जान सकते हैं। बाइबल सिखाती है कि परमेश्वर एक है, किन्तु उसका अस्तित्व तीन व्यक्ति: पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा में है। आइए हम देखें कि बाइबल कैसे प्रगतिशील तरीके से परमेश्वर को त्रिएक परमेश्वर के रूप में प्रकट करती है। 

कलीसिया त्रिएकता पर इसलिए विश्वास करती है, क्योंकि परमेश्वर ने स्वयं को त्रिएक परमेश्वर के रूप में प्रकट किया है।

परमेश्वर एक है।
हम आरम्भ में देखते हैं कि परमेश्वर ने स्वयं को मूसा पर एक ही  परमेश्वर के रूप में प्रकट किया था। इसलिए मूसा कहता है, “हे इस्राएल सुन! यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है ” (व्यवस्थाविवरण 6:4)। और इसी दावे को हम पुराने नियम के अन्य खण्डों में भी देखते हैं, जैसे “मैं ही यहोवा हूँ, अन्य कोई नहीं है, मेरे अतिरिक्त कोई परमेश्वर नहीं ” (यशायाह 45:5); “और यह जान लो कि मैं  वही हूँ, न तो मुझ से पहले कोई परमेश्वर हुआ, और न मेरे बाद कोई होगा ” (यशायाह 43:10)। इसी कारण से परमेश्वर चाहता था कि उसके लोग उसे छोड़ किसी और को ईश्वर करके न मानें (निर्गमन 20:3)। यह ऐसे समय में था जब इस्राएल के आस पास के देशों के (अर्थात् प्राचीन निकट पूर्व) बहु-ईश्वरवादी लोग अनेक ईश्वरों की आराधना करते थे। पुराने नियम में पाए जाने वाले एक परमेश्वर के सिद्धान्त का नया नियम विरोध नहीं करता है, परन्तु उसका समर्थन करता और शिक्षा देता है। इसी प्रकार नए नियम के मसीही भी बहु-ईश्वरवादियों के बीच में रहते हुए भी एक ही परमेश्वर पर विश्वास करते थे। इसी सिद्धान्त को सिखाते हुए यीशु मसीह ने कहा कि परमेश्वर एक है और वह एकमात्र सच्चा परमेश्वर है (मरकुस 12:29, यूहन्ना 17:3)। आरम्भिक यहूदी और गैर-यहूदी मसीहियों की अगुवाई करने वाले याकूब और पौलुस भी एक ही परमेश्वर पर विश्वास करते थे (1 तीमुथियुस 2:5, याकूब 2:19)। इसीलिए मसीही लोग एक परमेश्वर पर विश्वास करते हैं। इसी के साथ ही जो लोग बाइबल के परमेश्वर को छोड़ किसी और की आराधना करते हैं, तो यूहन्ना प्रकाशितवाक्य में चेतावनी देता है कि “मूर्तिपूजक” परमेश्वर के राज्य में प्रवेश न करेंगे (प्रकाशितवाक्य 22:15) परन्तु “उनका भाग उस झील में होगा जो आग और गंधक से जलती रहती है ” (प्रकाशितवाक्य 21:8)। इस प्रकार से हम देखते हैं कि बाइबल एक परमेश्वर के सिद्धांत में बहुत ही स्पष्ट है।

परमेश्वर एक है किन्तु अकेला नहीं है।
यद्यपि बाइबल परमेश्वर को एक ही परमेश्वर के रूप में प्रस्तुत करती है, फिर भी वह अकेला नहीं है। नया नियम हमें इसकी शिक्षा स्पष्ट रूप से देता है, और यह शिक्षा केवल नए नियम की नहीं परन्तु पुराने नियम की भी है। परमेश्वर ने पुराने नियम में अनेक प्रकार से झलक दिखाया/संकेत दिया है कि वह अकेला परमेश्वर नहीं है। उदाहरण के लिए, बाइबल के पहले ही अध्याय में हम पढ़ते हैं कि परमेश्वर ने कहा, “हम मनुष्य को अपने स्वरूप में, अपनी समानता के अनुसार बनाएं” (उत्पति 1:26)। इस पद में “हम” और “बनाएं” शब्द बहुवचन हैं, जो परमेश्वर में एक से अधिक व्यक्ति होने की सम्भावना को दिखाता है। (ध्यान दें कि यह बहुवचन शब्द अधिकार और महानता के लिए नहीं है, क्योंकि इब्रानी भाषा में बहुवचन अधिकार और महानता के लिए प्रयोग नहीं किया जाता था।)

यद्यपि बाइबल परमेश्वर को एक ही परमेश्वर के रूप में प्रस्तुत करती है, फिर भी वह अकेला नहीं है।

और भजन संहिता 110:1, में दाऊद, जो एक परमेश्वर पर विश्वास करता था, लिखता है, यहोवा ने मेरे प्रभु से कहा, ‘मेरे दाहिने बैठ, जब तक कि मैं तेरे शत्रुओं को तेरे चरणों की चौकी न बना दूँ।’” यहाँ दाऊद ‘यहोवा’ और ‘प्रभु’ को अलग दिखाते हुए आंशिक रूप से यह प्रकट करता है कि परमेश्वर अकेला नहीं है। इसी पद का उपयोग करते हुए पतरस दाऊद के प्रभु को यीशु मसीह के रूप में देखते हुए ऊंची आवाज़ में यहूदियों और अन्य जातियों के सामने उसे परमेश्वर के रूप में प्रस्तुत करता है (प्रेरितों के काम 2:32-34)। इस प्रकार पतरस स्वयं यीशु को परमेश्वर मानता है और उसका प्रचार करता है (मरकुस 12:35-37; प्रेरितों के काम 2:32-34, 2 पतरस 1:1)।

व्यवस्था और भजनों के साथ ही, भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तकों में भी हम देखते हैं कि इस्राएल का परमेश्वर एक है, किन्तु अकेला नहीं है। उदाहरण के लिए यशायाह 48:16 में लिखा है कि, “मेरे निकट आकर इस बात को सुनो:आदि से लेकर अब तक मैंने कोई बात गुप्त में नहीं कही, जब से यह हुआ तब से मैं वहाँ था, और अब प्रभु यहोवा और उसके आत्मा ने मुझे भेजा है।  इस पद में एक व्यक्ति है जो आदि काल से है और उसको यहोवा ने अपने आत्मा के द्वारा भेजा है। यह कोई आम व्यक्ति नहीं परन्तु त्रिएक परमेश्वर का एक व्यक्ति है जो आदिकाल से है। इसी प्रकार दानिय्येल लिखता है कि“मनुष्य के पुत्र के समान कोई, अनादिकाल के प्राचीन तक पहुँचा  . . . और उसको प्रभुता, महिमा, और राज्य दिए गए, . . . उसका प्रभुत्व सनातनकाल तक अटल है और उसका राज्य अविनाशी रहेगा (दानिय्येल 7:13-14)। यहाँ परमेश्वर अपना अधिकार उस व्यक्ति को दे रहा है जिसका प्रभुत्व अनन्तकाल तक रहेगा। किसी सामान्य मनुष्य के पास अनन्तकाल का अधिकार नहीं हो सकता है और न ही वह परमेश्वर के सम्मुख जा सकता है। नए नियम में यीशु इसी पद की ओर संकेत करते हुए अपने बारे में कहता है कि, “…तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी ओर बैठा हुआ और स्वर्ग के बादलों के साथ आते हुए देखोगे” (मरकुस 14:62)। जबकि भजन 110:1, यशायाह 48:16, और दानिय्येल 7:13-14 में हम परमेश्वर पुत्र की ओर संकेत पाते हैं, यहेजकेल 36:27 में हम पवित्र आत्मा की ओर स्पष्ट संकेत देखते हैं जब परमेश्वर कहता है, “मैं अपना आत्मा तुम में डालूंगा और तुम्हें अपनी विधियों पर चलाऊँगा।” इस प्रकार से हम देखते हैं कि पुराना नियम परमेश्वर में भिन्न व्यक्तियों की उपस्थिति की ओर संकेत करता है।

एक परमेश्वर, तीन व्यक्ति। 
जो बात पुराने नियम में हम संकेतों में पाते हैं, उसे हम स्पष्ट रीति से नए नियम में देखते हैं। यद्यपि अधिकतर नया नियम एक परमेश्वर पर विश्वास करने वाले यहूदियों द्वारा लिखा गया है, फिर भी वे मानते थे कि पिता परमेश्वर है, पुत्र परमेश्वर है, और पवित्र आत्मा परमेश्वर है। परमेश्वर के पिता होने की बात पर प्रभु के एक दास ने कहा कि परमेश्वर अनन्तकाल से पिता है क्योंकि उसके पास पुत्र (यीशु) है।1 नए नियम में यीशु मसीह सबसे अधिक परमेश्वर पिता के बारे में बात करता है। सुसमाचारों में यीशु प्रायः परमेश्वर को पिता कहकर सम्बोधित करता है, और वह अपने शिष्यों को “पिता” से प्रार्थना करने के सम्बन्ध में सिखाता है। इसके साथ ही आरम्भिक कलीसियाओं को पत्र लिखते हुए पौलुस अकसर आरम्भ में पिता परमेश्वर की ओर से आशीष देता है (गलातियों 1:1; इफिसियों 1:2; फिलिप्पियों 1:2; कुलुस्सियों 1:2)। और पौलुस अनेक प्रकार से पिता के बारे में शिक्षा देता है। उदाहरण के लिए, “हमारे प्रभु यीशु का पिता परमेश्वर धन्य हो . . .” (इफिसियों 1:3); “और सब का एक ही परमेश्वर पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य और सब में है ” (इफिसियों 4:6); “फिर भी हमारे लिए तो एक ही परमेश्वर है, अर्थात् पिता, जिसकी ओर से सब कुछ है और जिसके लिए हम भी हैं” (1 कुरिन्थियों 8:6)। उपरोक्त पद पिता को परमेश्वर के रूप में प्रकट करते हैं। 

नया नियम पिता के साथ पुत्र को भी परमेश्वर के रूप में प्रस्तुत करता है। हम पढ़ते हैं कि यीशु मसीह, परमेश्वर के साथ अनन्तकाल से है, और उसी के द्वारा और उसी के लिए सब वस्तुओं की सृष्टि हुई है (यूहन्ना 1:1-3, कुलुस्सियों 1:15-16)। यीशु स्वयं कहता है कि “मैं और मेरा पिता एक हैं (यूहन्ना 10:30)। जिस तत्व का परमेश्वर पिता है, उसी तत्व का यीशु मसीह भी है (इब्रानियों 1:3, यूहन्ना 14:10)। वह परमेश्वर के जैसे पापों को क्षमा करता है (मरकुस 2:5), आराधना स्वीकार करता है (यूहन्ना 20:28), और प्रकृति को नियंत्रित करता है (मरकुस 4:39)। इतना ही नहीं यीशु के द्वारा बार-बार स्वयं को “मैं हूँ” कहना उसके परमेश्वरत्व को प्रमाणित करता है (मरकुस 14:62, यूहन्ना 6:48, 11:25, 18:5-6), क्योंकि पुराने नियम में यहोवा परमेश्वर स्वयं को “मैं हूँ” कहता है (निर्गमन 3:14)। उदाहरण के लिए, जब वह कहता है, “इस से पहिले कि इब्राहिम उत्पन्न हुआ, मैं हूँ” (यूहन्ना 8:58), वह यह दावा कर रहा है कि उसका अस्तित्व अनन्त-काल से है। यह बात स्पष्ट है कि न केवल नये नियम के लेखक यीशु को परमेश्वर मानते हैं, परन्तु  यीशु भी स्वयं के परमेश्वर होने का दावा करता है।

इसके साथ ही कलीसिया पवित्र आत्मा को त्रिएक परमेश्वर में तीसरे व्यक्ति के रूप में इसलिए विश्वास करती है क्योंकि बाइबल ऐसे ही सिखाती है। पवित्र आत्मा के परमेश्वरत्व को हम यूहन्ना 14:16-17 में देखते हैं जब यीशु अपने समान “एक और सहायक” के भेजे जाने की बात करता है। यीशु यह भी कहता है कि यह सहायक पिता से निकलता है (यूहन्ना 15:26)। इसके साथ, प्रेरितों के काम 5:3-4 में पतरस हनन्याह से कहता है कि तू ने पवित्र आत्मा से झूठ बोला है, और फिर कहता है कि, “तू ने मनुष्यों से नहीं, परन्तु परमेश्वर से झूठ बोला है”। इस घटना से स्पष्ट है कि पतरस और उसके साथी पवित्र आत्मा को परमेश्वर मानते थे। यह दिखाता है कि मसीहियत के आरम्भ ही से पवित्र आत्मा को परमेश्वर माना जाता था। 

बाइबल में त्रिएकता शब्द नहीं पाया जाता है, हमने देखा कि एक ही परमेश्वर है और इस एक परमेश्वर में तीन भिन्न व्यक्ति हैं। परमेश्वर ने इस अद्भुत सिद्धान्त को प्रगतिशील रीति से अपने वचन में प्रकट किया है।

त्रिएक परमेश्वर की एक साथ अभिव्यक्ति
नया नियम न केवल यह स्पष्ट करता है कि पिता परमेश्वर है, पुत्र परमेश्वर है, और पवित्र आत्मा परमेश्वर है, किन्तु हम बहुत बार त्रिएकता के तीनों व्यक्ति को एक साथ पाते हैं। उदाहरण के लिए यूहन्ना 1:1, “आदि में वचन था और वचन परमेश्वर के साथ, और वचन परमेश्वर था” इस खण्ड में परमेश्वर के साथ वचन है अर्थात् वचन परमेश्वर से अलग है। लेकिन यह वचन परमेश्वर है अर्थात् जो वचन परमेश्वर के साथ है वह स्वयं भी परमेश्वर है। यह बात हमें त्रिएकता के दो भिन्न व्यक्तियों के बारे में समझाती है जो परमेश्वर हैं। इसी के साथ यीशु मसीह के जन्म घोषणा के समय स्वर्गदूत मरियम से कहता है कि “पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा और परम प्रधान का सामर्थ्य तुझ पर आच्छादित होगा। इसी कारण वह पवित्र पुत्र जो उत्पन्न होगा, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा” (लूका 1:35)। और फिर, यीशु के बपतिस्मा के वर्णन में हम पढ़ते हैं, “और जैसे ही वह (यीशु) पानी में से निकला तो उसने आकाश को खुलते हुए और आत्मा को कबूतर की भांति अपने  ऊपर उतरते हुए देखा, तब स्वर्ग से यह आवाज़ आई “तू मेरा प्रिय पुत्र है, मैं तुझ से अति प्रसन्न हूं ” (मरकुस 1:10-11)। और मत्ती के अन्त में महान आदेश में भी यीशु ने कहा कि विश्वासियों को पिता, पुत्र, और पवित्र आत्मा के नाम में  बपतिस्मा दो” (मत्ती 28:19)। और अपनी पत्री के अन्त में पौलुस कुरिन्थियों की कलीसिया को लिखता है कि प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह और परमेश्वर पिता का प्रेम और पवित्र आत्मा की सहभागिता तुम सब विश्वासियों के साथ होती रहे” (2 कुरिन्थियों 13:14)।

हालांकि बाइबल में त्रिएकता शब्द नहीं पाया जाता है, हमने देखा कि एक ही परमेश्वर है और इस एक परमेश्वर में तीन भिन्न व्यक्ति हैं। परमेश्वर ने इस अद्भुत सिद्धान्त को प्रगतिशील रीति से अपने वचन में प्रकट किया है। इसीलिए जिस कलीसिया का सदस्य मैं हूँ, वह त्रिएकता के बारे में विश्वास करती है कि “यह एकमात्र सच्चा परमेश्वर अनन्तकाल से तीन व्यक्तियों में सह-अस्तित्व में है: पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा (मत्ती 28:19; यूहन्ना 14:26; 2 कुरिन्थियों 13:14)। परमेश्वर की महिमा के लिए हमारे उद्धार को पूर्ण करने में त्रिएकता के तीन व्यक्तियों की भिन्न भूमिकाएँ हैं, परन्तु उनमें उद्देश्य की सिद्ध एकता पाई जाती है (1 पतरस 1:2)।

निश्चय ही यह मनुष्यों की कल्पना का परमेश्वर नहीं है! काश हम इस अद्भुत परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ते जाएं।“प्रभु यीशु मसीह का अनुग्रह और परमेश्वर पिता का प्रेम और पवित्र आत्मा की सहभागिता हम सब विश्वासियों के साथ होती रहे” (2 कुरिन्थियों 13:14)। आमीन।


1 Michael Reeves, Delighting in the Trinity, An Introduction to the Christian Faith, page- 27

Share on facebook
Share on twitter
Share on email
Share on whatsapp
Share on telegram